ऐतिहासिक बूढ़ा तालाब(स्वामी विवेकानंद सरोवर)

रायपुर में घूमने के लिए सब से अच्छी जगह में से एक है। यह रायपुर की सबसे बड़ी झील भी है। ऐतिहासिक बूढ़ा तालाब के बीचोबीच स्थित उद्यान में स्थापित स्वामी विवेकानंद की ऊंची प्रतिमा बनी हुई है।

कहा पास है स्वामी विवेकानंद सरोवर

बूढ़ा तालाब जिसे अब स्वामी विवेकानंद सरोवर के नाम से जाना जाता है ये डे भवन के पास ही स्थित है। डे भवन में स्वामी विवेकानंद रहते थे और इसी तालाब में डुबकियां लगाते थे। इस तलाब को 600 वर्ष पहले कल्चुरी वंश के राजाओं द्वारा खुदवाया गया था। इतिहासकारों के मुताबिक यह पहले 150 एकड़ में था जो अब मात्र लगभग 60 एकड़ में ही सीमित हो गया है।

कितना फीट ऊंची प्रतिमा बनी हुई है

ऐतिहासिक बूढ़ा तालाब के बीचोबीच स्थित उद्यान में स्थापित स्वामी विवेकानंद 37 फीट ऊंची प्रतिमा बनी हुई है।झील से लगभग 2.7कि.मी. दूर स्वामी विवेकानंद को समर्पित एक आश्रम है जहाँ स्वामी जी की विचारधारा के बारे में पढ़ाया जाता है।मुख्यमंत्री बघेल द्वारा शहर के मध्य स्थित स्वामी विवेकानंद सरोवर बूढ़ा तालाब को विकसित करने के साथ आम लोगों को मनोरंजन एवं पर्यटन की सुविधा उपलब्ध कराने विशेष पहल की गई है। इतिहासकारों की मानें, तो रायपुर में स्वामी विवेकानंद बचपन के समय दो वर्ष बिताए थे |

कौन से बुक में दर्ज है

जिसका नाम मूर्तियों का सबसे बड़ा नमूना होने के कारण लिम्का बुक में दर्ज है। इस तालाब में बचपन में स्वामी विवेकानंद दोस्तों के साथ नहाते थे। स्वामी जी का ज्यादातर बचपन रायपुर में ही बीता था। इसी के चलते यहां इनकी प्रतिमा स्थापित की गई। इसका अनावरण पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अप्रैल 2005 में किया था।

पहली बार कब आये थे स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद अपने पिता विश्वनाथ के साथ 1877 में यहां आए थे। स्वामी जी के पिता जो पेशे से वकील थे वकालत के कार्य से रायपुर आए थे और अपने दोस्त राय बहादुर डे के यहां ठहरे हुए थे। तब स्वामी विवेकानंद की उम्र 14 वर्ष थी |

क्या समस्या आई थी तालाब को संवारने में

बूढ़ा तालाब को संवारने में एक बड़ी समस्या तालाब के चारों तरफ फैली गंदगी थी| तालाब में पनपी गंदगी, कचरा, एवं जमें गाद की वजह से तालाब लगातार प्रदूषित होता जा रहा था। लोगों ने भी बूढ़ा तालाब-विवेकानंद सरोवर से दूरी बनानी शुरू कर दी थी।

मगर, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तालाबों के संरक्षण व संवर्धन को लोक जीवन से जोड़ते हुए इसके अस्तित्व को संवारने और इसे जन आकांक्षाओं के अनुरुप विकसित करने का संकल्प लिया। लगभग 1700 ट्रक कचरा एवं जलकुंभी निकालकर तालाब को एक नया रूप दिया गया है।

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